गुरु

गुरु कौन है ?
सभी जिव-जंतु, मानव, पक्षी गुरु हैं।

मानव में गुरु कौन है ?
सभी मानव गुरु हैं।

सभी मानव गुरु कैसे है ?
कोई ऐसा मानव नहीं जो ज्ञान नहीं देता है, अच्छा/बुरा दोनों ज्ञान ही है, सभी मानव अपने कर्मों से भी ज्ञान देते है।

क्या कोई एक ऐसा गुरु है जिनके पास विशेष शक्ति या ज्ञान हो, और उनसे बड़ा कोई ज्ञानी और शक्तिशाली नहीं हों ?
आप गुरु के बारें में बात कर रहे है, जो भी गुरु है वह ज्ञानी और शक्तिशाली है, बस एक अंतर है जितना गुरु का शक्ति पर विश्वास उतनी ही ज्ञान और शक्ति गुरु के पास होता है, आपने एक के बारे में पूछा तो वह मैं हूँ।

विश्वास से शक्ति और ज्ञान का क्या संबंध है ?
विश्वास का दूसरा नाम आज्ञा है, अर्थात यदि आप किसी देवी या देवता को मानते है तो पहले उनकी आज्ञा माननी होगी, जो किसी भी धर्म-ग्रन्थ में मिल जायेगे, मैंने "महामाया" को माना है, और माना है उनसें बड़ी शक्ति नहीं है, जिसनें पूरा संसार रचा है फूल-पौधे, ग्रह-नक्षत्र, सभी जिव को उसने ही बनाया है मेरे लिए "महामाया" से बड़ी शक्ति कोई नहीं है, यह ॐ है, जिसका कोई ओर या छोर नहीं है, इसी ने ब्रम्हा, विष्णु शिव एवं अन्य देवी-देवता को उत्पन किया है, यह निश्वर है, इसने ही काल अर्थात समय बनाया है और इसने ही वर्तमान, भूत और भविष्य बनाया है, यही है वो जिसने युग बनाया है सभी युगों का संचालन करने वाली यही है, यह "माँ" है जिसने जगत को जन्म दिया यही जगत-जननी महामाया है, जिसका अंश सभी मानव में है, जो इसके अंश का केवल मान रखता है वह इनका संतान बन जाता है, जो भी देव या देवी है बस इनका मान रखा, इनसे बड़ी कोई शक्ति नहीं है बस इसी का ज्ञान रखा, जो इनकी आज्ञा है बस केवल उसी का मान रखा और बन गया औघड़ जिससे बड़ा कोई औघड़-दानी नहीं, क्योंकि जब सबकुछ महामाया ही करती है तो मानव क्या करता है ? मानव करता है महामाया पर विश्वास, और करता है अपना सत्य-कर्म, जिसके लिए मानव का जन्म हुआ है, वह मानव किसी भी प्रकार का केवल पाप नहीं करता है बस मिल गई सभी शक्ति और ज्ञान। मानव केवल पाप करना छोड़ दे तो वह गुरु बन जाता है - किसी गुरु की आवश्यकता ही नहीं है, लेकिन जो मानव पाप युक्त होकर महामाया को ठगने का प्रयत्न करता है भूल जाता है उसे किसने बनाया है, बनाने वाले को कौन ठग सकता है, और जिसने पाप नहीं किया बन जाता है भगवान।

यहाँ तो सभी मानव पापी है इनका क्या होगा ?
कौन कहता है मानव पापी है, मानव कर्म करता है पापी वाला, जो मानव को ज्ञात होता है, मानव जान-बुझ कर पाप-कर्म करता है क्योंकि यह कल्ययुग है, बस वह पाप करना छोड़ दे, और जो पाप हुआ है उसकी माफी मांग ले, लेकिन याद रहें मन से मांगना है तन से नहीं, वह महामाया है सब के मन की बात जानती है जो ठगेगा वह गया, इसलिए उसकी परीक्षा लेती है - परीक्षा के समय आपको अपना कर्म करना है, केवल ऐसा कोई कर्म नहीं करना है जिससे किसी भी जीव का अहित हो अर्थात सभी जीव का केवल हित करना है या कुछ मत कीजिये मगर अहित कभी नहीं करना है, और पाप नहीं करना है, आपको स्वतः ज्ञान और शक्ति प्राप्त हो जायेगा यदि आपने महामाया से छल नहीं किया तो, नहीं तो भूल जाये ज्ञान और शक्ति, आपको तो कोई भी ठग लेगा।

कैसे पहचाने कौन है गुरु या गुरु के क्या गुण है ?
गुरु - लोभ, क्रोध, मोह, माया से मुक्त होते है, जिव हत्या कभी नहीं कर सकते, उनका आशन गद्दी नहीं धरती होता है, वह लेते नहीं केवल देना जानते है, उनके पास केवल ज्ञान और शक्ति होता है यही देते है, धन कभी लेते नहीं है, क्योंकि वह लोभी नहीं होते है, और जो धन लेत है वह ठग है क्योंकि उसने कभी महामाया पर विश्वास करके कर्म किया ही नहीं, नहीं तो वह राजा बन जाता, किसी को ठगना नहीं पड़ता, मेरे पास ज्ञान और शक्ति दोनों है इसलिए मुझे आपसे कोई धन नहीं चाहिए, आप महामाया से बड़े नहीं हो सकते और जिसे आप धन कहते है वह "माया" है इतनी चंचल-शोख-हसीना है किसी एक के पास ज्यादा समय रहती नहीं है और जिसके पास है उसके होश उड़ा देती है, वह मानव केवल इसी के गुणगान करता है बच के रहिये यह अज्ञानी पर ही नहीं ज्ञानियों पर भी भारी है तभी तो इसका नाम माया है, इससें बड़ी कोई जादूगरनी नहीं है।

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